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शहर में कुछ भी अजनबी नहीं था

फ़ानी दुनिया का अजीब सफ़र
फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़
Type: Print Book
Genre: Poetry
Language: Hindi
Price: ₹178 + shipping
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Description

कविता अक्सर वहाँ जन्म लेती है जहाँ शब्द कम पड़ जाते हैं।
मनुष्य अपने जीवन में बहुत कुछ महसूस करता है—प्रेम, बिछड़ना, अकेलापन, उम्मीद, डर, पछतावा और मृत्यु का मौन एहसास। लेकिन हर भावना को बोल पाना आसान नहीं होता। कुछ अनुभव केवल महसूस किए जा सकते हैं और कविता उन्हें आवाज़ देने का प्रयास करती है।
“शहर में कुछ भी अजनबी नहीं था” केवल शहर की कहानी नहीं है। यह हर उस इंसान की कहानी है जिसने जीवन की भीड़ में कभी न कभी अपने भीतर एक खालीपन महसूस किया है।
यह संग्रह उन क्षणों की कविताएँ हैं जहाँ इंसान स्वयं से प्रश्न करता है—
क्या हम वास्तव में जी रहे हैं या केवल समय के साथ चलते जा रहे हैं?
क्या रिश्ते हमेशा हमारे होते हैं?
क्या यादें मृत्यु के बाद भी किसी को जीवित रख सकती हैं?
क्या उम्मीद उस समय भी बची रहती है जब चारों तरफ़ अंधेरा हो?
इन कविताओं में शहर है, लेकिन शहर के पीछे छिपा हुआ इंसान भी है। यहाँ भीड़ है, लेकिन उसके बीच का अकेलापन भी है। यहाँ मृत्यु का विचार है, लेकिन जीवन से प्रेम भी है।
यह पुस्तक जीवन को किसी अंतिम उत्तर की तरह नहीं देखती, बल्कि एक यात्रा की तरह देखती है—एक ऐसी यात्रा जिसमें हर व्यक्ति कुछ खोता है, कुछ सीखता है और अंत में अपने भीतर लौटने की कोशिश करता है।
शायद ज़िंदगी का सबसे बड़ा रहस्य यही है कि हम सब जानते हैं कि सब कुछ एक दिन समाप्त हो जाएगा, फिर भी हम प्रेम करते हैं, सपने देखते हैं और उम्मीद रखते हैं।
यही मनुष्य होने की सबसे सुंदर बात है।
— फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़

About the Author

फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़ एक लेखक, विचारक और रचनात्मक लेखन से जुड़े लेखक हैं, जिनकी रुचि समाज, राजनीति, मानव संबंधों, न्याय, असमानता, लोकतंत्र और आम लोगों के जीवन से जुड़े प्रश्नों में है।
उनका लेखन अक्सर उन विषयों की ओर जाता है जिन्हें समाज में सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन जिनके भीतर गहरे मानवीय और सामाजिक प्रश्न छिपे होते हैं। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सत्ता और नागरिकों के संबंध, सामाजिक विभाजन, मानवीय गरिमा, संघर्ष, उम्मीद और व्यक्तिगत जिम्मेदारी जैसे विषयों पर विचार करने का प्रयास करते हैं।
फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़ का मानना है कि लेखन केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है। एक लेखक का काम पाठक को तैयार उत्तर देना ही नहीं, बल्कि कभी-कभी ऐसे प्रश्न उसके सामने रखना भी है जिनसे वह स्वयं अपने समाज और अपने भीतर को देखने लगे।
उनकी लेखकीय रुचि कविता, सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषण, कथा-साहित्य, विचारपरक लेखन तथा मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित रचनाओं तक विस्तृत है। उनकी रचनाओं में आम मनुष्य, उसके संघर्ष, उसकी चुप्पी, उसकी आशाएँ और उसकी गरिमा एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
उनका लेखन किसी एक वर्ग या समुदाय तक सीमित रहने के बजाय व्यापक मानवीय अनुभवों को समझने की कोशिश करता है। वे ऐसे साहित्य में विश्वास रखते हैं जो पाठक को केवल कहानी सुनाकर आगे न बढ़ जाए, बल्कि उसके भीतर कोई विचार, प्रश्न या संवेदना छोड़ जाए।
फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़ के लिए लेखन अंत नहीं, संवाद की शुरुआत है।
वे मानते हैं कि जब कोई पाठक किसी पुस्तक को पढ़कर स्वयं से कोई नया प्रश्न पूछता है, तब साहित्य अपना सबसे महत्वपूर्ण काम कर चुका होता है।
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लेखक का संदेश
“अगर किसी पुस्तक का एक पृष्ठ भी किसी व्यक्ति को सोचने, प्रश्न करने या किसी दूसरे इंसान की पीड़ा को समझने के लिए प्रेरित कर सके, तो वह लेखन व्यर्थ नहीं गया।”
— फ़ज़ल अबुबक्कर एसफ़

Book Details

Number of Pages: 58
Dimensions: 8"x11"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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