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“महर्षियों में मैं भृगु हूँ” - गीता अध्याय 10 , श्लोक 25।
पंजाब के भृगु दरबार, सुल्तानपुर लोधी में भृगु संहिता ग्रंथ, प्रश्न कुंडली के रूप में मौजूद है। दूर-दूर से लोग, जीवन से जुड़े मुद्दों पर प्रश्न पूछते हैं और उनके उत्तर पाते हैं। यह प्रश्न मन में ही रहते हैं और उनका जवाब स्वाभाविक ही ग्रन्थ में, पूछने वाले के नाम सहित आ जाता है। इस पुस्तक में इस प्रक्रिया की बारे में जानकारी दी गई है।
साथ ही, विशेष दिनों पर आध्यात्मिक ज्ञान, जो की गीता का सार है, प्रवचनों द्वारा दिया जाता है। यह बहुत सरल शब्दों और प्रसंगों के माध्यम से दिया जाता है। कलयुग में प्रत्यक्ष रूप से भगवत वाणी का प्रवाह इस माध्यम से हम पा सकते हैं। यह पुस्तक 2016 से 2025 तक के ऐसे ही आध्यात्मिक प्रवचनों का संकलन है।
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