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पुस्तक से लिया गया अंश
असन्तुष्ट ग्राहक = ताकतवर बाज़ार
बाजार हमेशा आपको असन्तुष्ट देखना चाहता है। आपकी असंतुष्टि ही बाजार का ईंधन है। बाजार आपसे पूछेगा : " आपके टूथपेस्ट में नमक है ?" आप कहेंगे : "नहीं है माई-बाप।" तो बाजार कहेगा : "यह लो यह वाला टूथपेस्ट, इसमें नमक है।" और आप कृतकृत्य हो जाएंगे। फिर बाजार आपसे पूछेगा : "आपके घर पर नमक है?" और आप इस बार "नहीं" कहने की ग्लानि से बचना चाहते हैं। आप कहेंगे : "हां, बिलकुल है न! नमक है मेरे घर पर।" और बाजार आपकी इसी आत्मसंतुष्टि का जन्मजात शत्रु है। वह पूछ लेगा : "अच्छा, उस नमक में आयोडिन है क्या ?" और आप फिर फँस जाएंगे। आपको कहना पड़ेगा कि नहीं है और बाजार तपाक से अपनी जेब से एक नमक कि थैली निकाल कर आपको थमा देगा और कहेगा : "यह लीजिए, आयोडिनयुक्त नमक।" बाजार आपको खुश तो रखेगा लेकिन आपको कभी संतुष्ट नहीं होने देगा।
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