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शिक्षा, जीवन-मूल्य एवं युवा पीढ़ी के भविष्य पर एक विचारोत्तेजक संवाद
क्या शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना है, या एक बेहतर इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनना भी है?
आज के बदलते सामाजिक परिवेश में शिक्षा, संस्कार, नैतिक मूल्य और युवा पीढ़ी के भविष्य से जुड़े प्रश्न अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। प्रस्तुत पुस्तक इन्हीं विषयों पर पाठकों को गंभीरता से सोचने, समझने और विचार-विमर्श करने के लिए प्रेरित करती है।
स्वर्गीय भागवत प्रसाद वर्मा, एडवोकेट की मूल रचना, जो सन् 1980 में लिखी गई थी, के उपलब्ध पुराने पृष्ठों पर आधारित यह पुनर्संकलन शिक्षा और जीवन-मूल्यों के पारस्परिक संबंध को समझने का एक प्रयास है। संकलनकर्ताओं ने इस रचना को वर्तमान पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है, ताकि इसके विचार नई पीढ़ी के लिए भी चिंतन का आधार बन सकें।
पुस्तक में क्या पढ़ने को मिलेगा?
इस पुस्तक में शिक्षा, संस्कार और युवा पीढ़ी के भविष्य के साथ-साथ अनेक महत्वपूर्ण सामाजिक विषयों पर विचार प्रस्तुत किए गए हैं, जिनमें प्रमुख हैं:
शिक्षा और जीवन-मूल्य: शिक्षा के वास्तविक उद्देश्य तथा व्यक्ति के चरित्र निर्माण में संस्कारों की भूमिका।
युवा पीढ़ी का भविष्य: युवाओं की सोच, सामाजिक जिम्मेदारी और भविष्य के प्रति दृष्टिकोण।
सामाजिक चेतना एवं मानवीय गरिमा: समाज में संवेदनशीलता, मानवीय मूल्यों और जागरूकता का महत्व।
गरीबी, शोषण एवं सामाजिक समस्याएँ: सामाजिक परिस्थितियों, कानून-व्यवस्था और बदलती मानसिकता से जुड़े प्रश्न।
जनसेवा एवं स्वच्छ राजनीति: नागरिक जिम्मेदारी, सार्वजनिक जीवन और समाज के प्रति कर्तव्यबोध।
शिक्षा, स्वावलंबन एवं सामाजिक न्याय: एक बेहतर समाज के निर्माण में शिक्षा, आत्मनिर्भरता और मानवीय दृष्टिकोण की भूमिका।
यह पुस्तक किनके लिए उपयोगी है?
यह पुस्तक विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों, युवाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षा से जुड़े व्यक्तियों तथा समाज और जीवन-मूल्यों पर चिंतन करने वाले पाठकों के लिए उपयोगी हो सकती है।
इसका उद्देश्य किसी विचार को अंतिम सत्य के रूप में प्रस्तुत करना नहीं, बल्कि पाठकों को प्रश्न पूछने, विभिन्न दृष्टिकोणों पर विचार करने और शिक्षा तथा समाज के प्रति अपनी समझ विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
मूल लेखक एवं संकलनकर्ता
मूल लेखक:
स्वर्गीय श्री भागवत प्रसाद वर्मा, एडवोकेट
संकलनकर्ता:
श्री आनंद बिहारी श्रीवास्तव
भूतपूर्व अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं पूर्व अध्यक्ष, जिला उपभोक्ता विवाद परितोष आयोग।
श्री संजय कुमार श्रीवास्तव
भूतपूर्व उप महाप्रबंधक, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (POWERGRID)।
एक विचारोत्तेजक प्रयास
यह पुस्तक पाठकों को इस प्रश्न पर विचार करने के लिए आमंत्रित करती है कि शिक्षा किस प्रकार ज्ञान के साथ चरित्र, संस्कार, सामाजिक चेतना और जिम्मेदार नागरिकता के विकास में योगदान दे सकती है।
यदि हम एक संवेदनशील, जागरूक और जिम्मेदार युवा पीढ़ी का निर्माण करना चाहते हैं, तो शिक्षा और जीवन-मूल्यों के संबंध पर गंभीर संवाद आवश्यक है। यही इस पुस्तक का केंद्रीय उद्देश्य है।
पुस्तक पढ़ें, विचार करें और शिक्षा, जीवन-मूल्यों तथा समाज के भविष्य पर सार्थक संवाद को आगे बढ़ाएँ।
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