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मतभेद: विरोध से अभिन्नता की ओर
क्या अद्वैत दर्शन केवल दूसरों का खंडन करता है? क्या अलग-अलग दार्शनिक विचार एक-दूसरे के विरोधी हैं? पुस्तक 'मतभेद' विचारों के इसी भ्रम को तोड़ती है और एक नई दृष्टि प्रस्तुत करती है।
अद्वैत वेदांत को अक्सर केवल तर्क और खंडन का मार्ग मान लिया जाता है, लेकिन यह पुस्तक दर्शाती है कि अद्वैत वास्तव में सत्य का वह महासागर है जिसमें दुनिया के सभी दर्शन, विचार और दृष्टिकोण समाहित होते हैं। कोई भी दर्शन गलत या अधूरा नहीं है—हर विचार एक ही परम सत्य का एक भिन्न पहलू है।
यह पुस्तक दार्शनिकों और विचारकों को आपस में टकराने के बजाय यह समझने का निमंत्रण देती है कि हर दृष्टिकोण एक-दूसरे के बिना अधूरा है। जब सभी मार्ग एक ही सत्य की ओर ले जाते हैं, तो फिर 'मतभेद' कैसा? आइए, इस वैचारिक यात्रा के माध्यम से जाने कि कैसे विरोधी दिखने वाले विचार भी मूलतः एक ही हैं।
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