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किताबें क्या वाकई ज़िंदगी बदल सकती हैं? मेरे लिए, ये वे इकलौते दोस्त थे जो तब भी साथ रहे जब सब छोड़कर चले गए थे। इस बेहद निजी और प्रेरणादायक संस्मरण (Memoir) में, मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से शहर से लेकर नोएडा जैसे महानगर तक के अपने सफर को साझा कर रहा हूँ, जिसमें मेरे जन्म से लेकर 20 साल की उम्र तक के वो उतार-चढ़ाव भरे साल शामिल हैं। यह किताब सिर्फ एक आत्मकथा नहीं है; यह हर उस युवा के लिए एक मार्गदर्शिका (Roadmap) है जो जीवन में कुछ बड़ा करना चाहता है। इसमें मैंने खुलकर बात की है कि कैसे मैंने गणित (Mathematics) में मिली एक बेहद करारी हार को—सिर्फ 7 नंबर से 73 नंबर तक पहुँचकर—एक बड़ी जीत में बदला। और यह सब मुमकिन हुआ "एकलव्य" मानसिकता (Mindset) को अपनाने और सही मार्गदर्शन (Mentorship) की ताकत से।
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