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मनुष्य के जीवन में यदि किसी का सबसे बड़ा योगदान होता है, तो वह उसके माता-पिता का होता है। वे अपने बच्चों के सुखद भविष्य के लिए अपने सपनों, इच्छाओं और आराम का त्याग कर देते हैं। उनके जीवन का एकमात्र उद्देश्य यही होता है कि उनका पुत्र या पुत्री उनसे बेहतर जीवन जिए, शिक्षा प्राप्त करे और समाज में सम्मान के साथ खड़ा हो सके।
यह पुस्तक ऐसे ही एक साधारण परिवार की असाधारण कहानी है।
यह कहानी एक पिता के अथक परिश्रम, एक माँ के निःस्वार्थ त्याग और उनके पुत्र के संघर्ष की प्रेरक यात्रा को प्रस्तुत करती है। सीमित साधनों, आर्थिक कठिनाइयों और अनेक चुनौतियों के बावजूद माता-पिता अपने बेटे की शिक्षा में कोई कमी नहीं आने देते। वे स्वयं कष्ट सहते हैं, परंतु अपने पुत्र के सपनों को टूटने नहीं देते।
पिता दिन-रात कठिन परिश्रम करते हैं। कभी अपनी आवश्यकताओं को त्यागते हैं, कभी पैदल चलकर पैसे बचाते हैं, तो कभी चिंता और थकान को छिपाकर अपने पुत्र के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करते हैं। वहीं माँ अपने त्याग, ममता और प्रार्थनाओं से पूरे परिवार को संबल देती है।
इन दोनों के प्रेम, तपस्या और संस्कारों का परिणाम यह होता है कि उनका पुत्र कठिन परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर एक उच्च अधिकारी बनता है। उसकी सफलता केवल उसकी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं होती, बल्कि उसके माता-पिता के वर्षों के त्याग, संघर्ष और आशीर्वाद का प्रतिफल होती है।
यह पुस्तक केवल एक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि उन लाखों माता-पिताओं को समर्पित है जो अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अपना संपूर्ण जीवन अर्पित कर देते हैं। यह हमें याद दिलाती है कि हमारी प्रत्येक उपलब्धि के पीछे हमारे माता-पिता का मौन संघर्ष, उनका निःस्वार्थ प्रेम और उनके अनगिनत बलिदान छिपे होते हैं।
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