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Atmatattvaviveka

आत्मतत्त्वविवेक [मूल संस्कृत उदयन, संस्कृतसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर]
मूल संस्कृत उदयन, संस्कृतसँ मैथिली अनुवाद गजेन्द्र ठाकुर
Type: Print Book
Genre: Philosophy
Language: Maithili
Price: ₹563 + shipping
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Description

अनुक्रम
आत्मतत्त्वविवेक
❖ ❖ ❖
प्रकाशन आ प्रतिलिप्यधिकार
«आत्मतत्त्वविवेक»क मैथिली अनुवाद : भारतीय आ पाश्चात्य साहित्यिक तथा अनुवाद-सिद्धान्तक आलोकमे विस्तृत समीक्षा
१. उपक्रम : एकटा पाठक घरवापसी
२. मूलग्रन्थक विधागत स्वरूप : शास्त्र जे साहित्य थिक
३. भारतीय काव्यशास्त्रक आलोकमे
३.१ रस-विमर्श : शान्तक अङ्गित्व, वीर आ हास्यक अङ्गता
३.२ ध्वनि-विमर्श : वाच्यसँ आगाँ
३.३ वक्रोक्ति आ अलंकार-योजना
३.४ गुण, रीति आ औचित्य
४. भारतीय अनुवाद-परम्पराक आलोकमे
५. पाश्चात्य अनुवाद-सिद्धान्तक आलोकमे
५.१ श्लायरमाखरक द्विपथ आ भेनुटीक विदेशीकरण
५.२ नाइडा, न्यूमार्क आ स्कोपोस
५.३ स्टाइनरक चतुश्चरण आ बेन्यामिनक उत्तरजीवन
५.४ लेफेभेयरक पुनर्लेखन, बहुतन्त्र-सिद्धान्त आ संरक्षण-प्रश्न
६. तुलनात्मक दर्शन : उदयन पश्चिमक आइनामे
७. भाषिक मूल्याङ्कन : उपलब्धि आ सीमा
७.१ उपलब्धि
७.२ सीमा आ सुझाव
८. परिवर्धित संस्करणक ग्रन्थ-रचना : परिपाठक समीक्षा
९. विदेह समानान्तर धाराक परिप्रेक्ष्यमे
१०. उपसंहार आ समेकित मूल्याङ्कन
'आत्मतत्त्वविवेक' : न्याय-वैशेषिक दर्शन आ बौद्ध मतक विमर्शक परिप्रेक्ष्यमे एकटा गम्भीर दार्शनिक आ भाषावैज्ञानिक शोध-प्रबन्ध
१. प्रस्तावना आ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
२. दार्शनिक गद्यक रूपमे मैथिलीक सामर्थ्य आ गजेन्द्र ठाकुरक योगदान
३. खण्ड १: क्षणिकवादक खण्डन आ स्थायित्वक सिद्धि
३.१ सामर्थ्य आ असामर्थ्यक विमर्श: बीज-अङ्कुर दृष्टान्त
३.२ अपोहवादक (Theory of Exclusion) खण्डन
३.३ विनाशक अनिवार्यताक (Inevitability of Destruction) खण्डन
४. खण्ड २: बाह्य वास्तविकताक निषेधक खण्डन (विज्ञानवादक विमर्श)
४.१ सह-उपलम्भ नियमक समीक्षा (Refutation of Sahopalambha Niyama)
४.२ शून्यवादक खण्डन (माध्यमिक मत समीक्षा)
५. खण्ड ३: गुण आ गुणयुक्त वस्तुक भेद (द्रव्य-गुण मीमांसा)
५.१ 'समूह' (Aggregation) सिद्धान्तक खण्डन
५.२ अवयव आ अवयवीक भेद (Parts and the Whole)
५.३ 'भेद' (Difference) क स्वरूप
६. खण्ड ४: आत्माक यथार्थता, ईश्वर आ मोक्षक स्वरूप (नैरात्म्यवाद खण्डन)
६.१ आत्माक सिद्धि: प्रत्यभिज्ञा (Recognition) आ स्मृति (Memory)
६.२ ईश्वरक सिद्धि: कार्य-कारण सिद्धान्त
६.३ वेदक प्रामाण्य आ चिकित्साशास्त्रक दृष्टान्त
६.४ मोक्षक यथार्थ स्वरूप
७. बौद्धिक सन्दर्भ, आधुनिक अकादमिक संस्था आ शोधक दिशा
८. गम्भीर दार्शनिक निष्कर्ष (Deep Insights & Broader Implications)
९. उपसंहार
‘आत्मतत्त्वविवेक’क मैथिली अनुवाद : भारतीय आ पाश्चात्य साहित्यिक तथा अनुवाद-सिद्धान्तक आलोकमे विस्तृत समीक्षा
१. प्रारम्भिक मूल्याङ्कन
२. कृतिक विधागत स्वरूप: दर्शन, विवाद आ साहित्यक संगम
२.१ दार्शनिक विवाद एकटा ज्ञान-नाटक रूपमे
२.२ तर्कक कथानक
२.३ बिम्ब-मालाक एकता
३. भारतीय साहित्यिक सिद्धान्तक आलोकमे समीक्षा
३.१ रस-सिद्धान्त
क. शान्त रस: प्रधान अन्तर्धारा
ख. वीर रसक बौद्धिक रूप
ग. हास्य आ व्यङ्ग्य
घ. करुण रसक आधार
३.२ ध्वनि-सिद्धान्त
प्रथम ध्वनि: आत्मज्ञानक अनिवार्यता
दोसर ध्वनि: भाषा आ यथार्थक सम्बन्ध
तेसर ध्वनि: मैथिलीक बौद्धिक पुनर्स्थापना
३.३ वक्रोक्ति आ अलंकार
प्रश्नोक्तिमूलक वक्रता
व्यङ्ग्य-वक्रता
दृष्टान्त-अलंकार
रूपक
३.४ रीति आ गुण-सिद्धान्त
प्रसाद गुण
ओज गुण
माधुर्य गुण
सीमा
३.५ औचित्य-सिद्धान्त
पारिभाषिक औचित्य
वाक्यगत औचित्य
सम्पादकीय अनौचित्य
३.६ आकांक्षा, योग्यता, सन्निधि आ तात्पर्य
आकांक्षा
योग्यता
सन्निधि
तात्पर्य
४. पाश्चात्य साहित्यिक सिद्धान्तक आलोकमे समीक्षा
४.१ रूपवाद आ नवी समीक्षा
४.२ बाक्तिनक संवादवाद
४.३ संरचनावाद
४.४ विखण्डनवादी दृष्टि
४.५ व्याख्याशास्त्र
४.६ घटनाविज्ञान
४.७ पाठक-प्रतिक्रिया सिद्धान्त
४.८ उत्तर-औपनिवेशिक आ देशज ज्ञान-दृष्टि
५. अनुवाद-सिद्धान्तक आलोकमे समीक्षा
५.१ ई कोन प्रकारक अनुवाद अछि?
५.२ नाइदाक गतिशील समतुल्यता
५.३ न्यूमार्कक अर्थपरक आ संप्रेषणपरक अनुवाद
अर्थपरक पक्ष
संप्रेषणपरक पक्ष
५.४ प्रयोजन सिद्धान्त
५.५ देशीकरण आ विदेशीकरण
विदेशीकरण
देशीकरण
५.६ टूरीक लक्ष्य-पाठ मानदण्ड
५.७ जुलियाने हाउसक प्रत्यक्ष अनुवाद
५.८ बर्मनक विकृति-प्रवृत्ति
तर्कसंगतीकरण
स्पष्टीकरण
विस्तार
लय-परिवर्तन
५.९ अनुवादकक दृश्यता
६. अनुवादक विशिष्ट उपलब्धि
६.१ मैथिली दार्शनिक शब्दकोशक निर्माण
६.२ संस्कृत-भार न्यून करब
६.३ तर्कक मौखिकीकरण
६.४ मूलक व्यङ्ग्य आ बिम्बक संरक्षण
६.५ दार्शनिक भावकेँ साहित्यिक परिणति
७. मुख्य सीमासभ
७.१ स्रोत-संस्करणक अभाव
७.२ मूल आ अनुवादक हस्तक्षेपक भेद अस्पष्ट
७.३ आरम्भिक शोध-प्रबन्धक प्रशस्तिपरक स्वर
७.४ पाश्चात्य तुलनाक अपर्याप्त विस्तार
७.५ भाषा-रजिस्टरक असमानता
७.६ अनुच्छेदक अधिक लम्बाइ
७.७ शीर्षकक पुनरावृत्ति
७.८ पारिभाषिक रूपक एकरूपता
७.९ विवादात्मक आ सांस्कृतिक टिप्पणी
७.१० सन्दर्भसूचीक कमजोरी
८. संशोधित आलोचनात्मक संस्करण लेल ठोस सुझाव
१. आधार-पाठक स्पष्ट विवरण
२. मूल श्लोक आ सूत्र-संख्या
३. अनुवाद-नीति
४. पूर्वपक्ष-उत्तरपक्षक मुद्रणगत भेद
५. दीर्घ अनुच्छेदक विभाजन
६. पारिभाषिक शब्दकोश
७. विषयानुक्रमणिका
८. भूमिकाक पुनर्लेखन
९. अंग्रेजी पदक नियन्त्रण
१०. सन्दर्भसूचीक पुनर्गठन
९. समेकित मूल्याङ्कन
१०. अन्तिम निष्कर्ष
परिशिष्ट : मूल ग्रन्थक मैथिली अनुवाद

About the Authors

Gajendra Thakur, MBA (Finance), Post Graduate in Law, PG Diploma in Cyber Law & Cyber Forensics, CIC, CLD, Kovid in Samskrit, is editor of Videha, Ist Maithili Language Fortnightly eJournal ISSN 2229-547X at www.videha.co.in

Book Details

ISBN: 9789359438573
Publisher: Videha eJournal
Number of Pages: 523
Dimensions: 6"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Hard Cover (Case Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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