You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
क्या सड़क कभी काग़ज़ पर बन सकती है? क्या 2.4 करोड़ रुपये लापता हो सकते हैं? ये किताब 7 सच्ची कहानियों का दस्तावेज़ है - ग्राम पंचायत से लेकर संसद तक फैले भ्रष्टाचार की। "काग़ज़ पर बनी सड़क, जमीन पर कीचड़" जैसे मामलों कैसे उजागर किया गया, इसकी पूरी पड़ताल। हर आम नागरिक के लिए जो सिस्टम से लड़ना चाहता है।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book 21वीं सदी के घोटाले.