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कायनात में वसी

कायनात में वसी
वसी अहमद क़ादरी
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Religion & Spirituality
Language: Hindi, English
Price: ₹650 + shipping
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Description

हमारी कविताएं और लेख _ मज़हबी, सियासी, साइंस, समाजी माहौल और इंसानी फ़िक्र वो अमल पर आधारित लेख है जो दुनियां की आठ अरब आबादी को पसंद आ आना चाहिए !

दरवेश ! वसी अहमद क़ादरी ! वसी अहमद अंसारी ।

Our poems and articles—rooted in themes of religion, politics, science, the social environment, and human thought and action—are writings that should appeal to the world's population of eight billion people!

Darvesh | Wasi Ahmad Qadri | Wasi Ahmad Ansari

About the Author

वसी अहमद क़ादरी " वसी अहमद अंसारी का एक लम्हें ज़िन्दगी का लम्हा परिचय
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माता पिता जी के मौत के बाद वैसा ही देखने को मिला है हमें इसलिए फ़िर कहता हूं कि मेरा परिचय और तारीफ़ कुछ नहीं है मेरी तारीफ़ मेरे माता पिता जी की चरित्र , आचरण और उनके कर्म और कारनामे से जुड़ी है लिहाज़ा माता पिता का कारनामा जैसा होगा उसके संतान पर पड़ती है सच्चा पक्का, ईमानदा और दयालु माता पिता की संतान कुछ न कुछ असर रखती लेकिन बहुत लोग समाज की माहौल में बदल जाते हैं और एक असूल वाले लोग अपने असूल पर क़ायम रहते हैं ! हमने अपनी ज़िंदगी के अनुभव में पाया और देखा है कि ननिहाल, ददिहाल और रिश्तेदारों से बहुत सताया गया हूं बावजूद इसके हर दुःख तकलीफ़ दिल में रखते हुए सब्र किया के हम आगर किसी से बदला लेने का इरादा किया तो मेरी जीवन उलझ जाएगी और हम कामयाबी की मंज़िल नहीं पा सकेंगे और कामयाबी की दो किस्में है एक मिटने वाली दुनियां में चंद दिनो कि कामयाबी क्यूं के मौत तो आना ही आनी है इस से न हम बच सकेंगें और न ही कोई दुनियां में ऐसा इंसान देखने या सुनने में मिली है की कोई सदा के लिए जीवित रहा है यहां दुनियां में यहां दिल गवाही देती है के हमें जन्म देने वाले खुदा ने यूहीं नहीं भेजा है वह दिखाई भी नहीं देता और कायनात का निज़ाम भी चल रहा है और तरह तरह जीव प्राणी को मेरी नज़र देखती है इन तमाम हालत पर गौर वो फ़िक्र करने के बाद दिल ज़वाब देती है कि दुनियां में बे शुमार आबादी है उन आबादियां में किसी का किसी भी मामले में नक़ल नहीं करने हैं हम कुछ ऐसा करें के किसी जीव प्राणी और जंतु को हानि नहीं पहुंचे मतलब ये कि कोई मेरे कर्म और कारनामे का नक़ल करे हमें किसी का नक़ल नहीं करने हैं।

मेरी बचपना, जवानी और फ़िर मेरे शादी होने तक रिश्तेदारों से लेकर जानने वाले लोगों ने भी मेरे कर्म और कारनामे में टांग अराते रहे फ़िर भी हम न किसी का शिकायत किया हैऔर न ही सुनने में दिलचस्पी रही महज़ इसलिए कि समय की बर्बादी चरित्र आचरण में दाग लगना जैसा एहसास हुआ मेरे इस कारनामे से लोग हमसे दूर होते गए और हम तनहा हो गए मेरी तन्हाई जीवन ने खुदा की कायनात और खुदा की जीव प्राणी और जंतु के बारे में ख़्याल उभरती रही के आख़िर खुदा इन सभी को क्यूं पैदा किया फ़िर दिल में ख़्याल आता है कि इन सभी की ज़िम्मेदारी तुम पर है तुम्हारे सामने जो नज़र आए उसकी हक़ तुम्हे अदा करो हैं ये मेरा काम नहीं है क्यूं के हम इंसान के रु ब रु नहीं होते और हमने तुम्हे हाथ पैर _ दिल दिमाग़ सब कुछ दिया है सोचने समझने के बाद सोच समझ कर दिल दिमाग़ को काबू में रखते हुए अपने कामों को अंजाम दो क्यों केतुम्हारी मौत होगी और मरने के बाद मेरे पास आना है इसलिए मैं कहता हूं कि मेरा कोई परिचय और तारीफ़ नहीं है हम जैसा कर्तव्य इस दुनियां में करेंगे यही मेरी तारीफ़ होगा जिसे हम देख नहीं सकते जो लोग जब तक जीवित रहेंगे मेरा अच्छा और ख़राब किया गया करनामा जब तक दुनियां रहेगी लोग पढ़ते रहेगें मतलब खुदा की हुक्म और उसका तारीफ़ करने में ही मेरी भलाई है यानि बुरे चरित्र आचरण वाले लोगों के दिल में अच्छी ख्यालात नहीं उभरती है इसलिए अच्छे चरित्र आचरण वाले लोगों को बुराई करने में उनकी उम्र गुज़र जाती है अच्छा खाने अच्छे कपड़े और अच्छा मकान रहने को मिल जाता है जिसे वह कामयाबी समझता है जिसे ख़ुद मालूम नहीं है कि मेरी जीवन कितनी है लिहाज़ा हमने हर पहलू और खुदा की पैदा किया हुआ जीव प्राणी और जंतु पर गौर किया इसलिए हमें किसी भी मौजी पर लिखने में न क़िताब पढ़ने की ज़रूरत होती है और न ही किसी से सलाह लेने की क्यूं वह उस लायक़ नहीं है जो हमें सलाह दे सके यानि खुदा ने मुझे अपने मोहताजी में रखा है दुनियां की अवाम हमें पढ़ सके अपनी ज़िंदगी बनाने और बिगाड़ने में हर subject पर लेख और बहुत सारे कविताएं लिखी है मेरा हर कविता अपने आप में एक किताब है जितना लिख सकता हूं लिख रहा हूं और जब तक सांस चल रही है लिखता रहूंगा मगर क़िताब छपवानेके लिए पैसे नहीं है इसलिए सोशल मीडिया के सभी साइट पर लिखता हूं आप पढ़ सकते हैं लोग हमें WASI AHMAD QADRI ( WASI AHMAD ANSARI के नाम से जानते हैं और ये नाम भी मेरा नहीं ये नाम भी खुदा का है यही मेरा परिचय और तारीफ़ है।

WASI AHMAD QADRI

Book Details

Publisher: WASI AHMAD QADRI
Number of Pages: 283
Dimensions: 7"x9"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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