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एक भोज हजार भोज केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि समाज में प्रचलित मृत्यु भोज जैसी कुप्रथा पर गंभीर विचार करने का आमंत्रण है। यह पुस्तक बताती है कि शोक के समय दिखावे, सामाजिक दबाव और अनावश्यक खर्च का बोझ किस प्रकार परिवारों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक कठिनाइयों में डाल देता है।
सरल भाषा, तर्क, उदाहरण और मानवीय दृष्टिकोण के माध्यम से लेखक पाठकों को यह सोचने के लिए प्रेरित करता है कि दिवंगत व्यक्ति के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि आडंबरपूर्ण भोज नहीं, बल्कि सद्कर्म, सेवा और समाजहित के कार्य हैं।
यदि आप सामाजिक सुधार, जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन में विश्वास रखते हैं, तो "एक भोज हजार भोज" आपके लिए एक विचारोत्तेजक और प्रेरणादायक पुस्तक है।
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