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पाँच किशोर उपन्यास

भारतीय किशोरों के लिए एक ‘अवश्य पढ़ें’ संग्रह
विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय (लेखक), जयदीप शेखर (अनुवादक)
Type: Print Book
Genre: Literature & Fiction, Teens
Language: Hindi
Price: ₹625 + shipping
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Description

हिन्दी में ‘बाल साहित्य’ के बाद सीधे ‘बड़ों का साहित्य’ आ जाता है, जबकि बाँग्ला में इन दोनों के बीच एक श्रेणी ‘किशोर साहित्य’ की होती है, जिसमें रहस्य-रोमांच से भरपूर साहसिक, जासूसी, भूतिया इत्यादि कहानियाँ और उपन्यास होते हैं। किशोर साहित्य को बाँग्ला में सम्मानजनक स्थान मिला हुआ है और यही कारण है कि प्रायः सभी बड़े एवं नामचीन बाँग्ला लेखकों ने किशोरों को ध्यान में रखकर कुछ-न-कुछ लिखा है। कुछ लेखक तो किशोर साहित्य के लेखक के रूप में ही ज्यादा जाने जाते हैं। बाँग्ला का किशोर साहित्य न केवल स्तरीय एवं उत्कृष्ट है, बल्कि इसका जखीरा भी बहुत विशाल है।
बाँग्ला साहित्य के महान लेखक विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय ने किशोरों को ध्यान में रखकर पाँच उपन्यास लिखे हैं, जिनमें से चार को साहसिक गाथाओं और एक को जासूसी कहानी की श्रेणी में रखा जा सकता है। पाँचों कहानियों के हिन्दी अनुवाद इस संग्रह में शामिल हैं।
संग्रह की पहली कहानी ‘चाँद का पहाड़’ अफ्रीका के जंगल-पर्वतों में एक भारतीय किशोर शंकर रायचौधरी के रोमांचक अभियान की गाथा है। पुर्तगाली खोजी (स्वर्णान्वेषी) दियेगो अलवरेज उसके मार्गदर्शक होते हैं। इस गाथा को “महान भारतीय साहसिक गाथा” की उपमा दी जा सकती है। मूल बाँग्ला उपन्यास की भूमिका में लेखक ने स्पष्ट किया है कि यह कहानी किसी विदेशी कहानी पर आधारित नहीं है, बल्कि इसकी घटनाएं एवं पात्र उनकी खुद की कल्पना की उपज हैं। हाँ, अफ्रीका की भौगोलिक स्थितियों के वर्णन के लिए उन्होंने कुछ विदेशी भू-पर्यटकों की पुस्तकों की मदद ली है।
दूसरी कहानी ‘सुन्दरबन में सात साल’ में गंगासागर मेले में एक बालक जलदस्युओं के चंगुल में पड़कर सुन्दरबन के जंगलों में पहुँच जाता है और वहाँ वह सात वर्षों तक रहता है। बेशक, उसके दो दोस्त भी बन जाते हैं वहाँ। इस दौरान तरह-तरह के रोमांचक एवं जोखिम भरे अनुभवों से गुजरता है वह। इस कहानी की शुरुआत (लगभग एक तिहाई अंश) भुवन मोहन राय ने 1895 में की थी। 1950 से पहले विभूतिभूषण ने (लगभग दो-तिहाई अंश लिखते हुए) इसे पूरा किया।
तीसरी कहानी ‘वीरान टापू का खजाना’ में रहस्यमयी सुलू सागर में स्थित एक वीरान एवं अज्ञात टापू का जिक्र है, जहाँ घने जंगलों के नीचे 9वीं शताब्दी के एक हिन्दू राजा की राजधानी के ध्वंसावशेष दबे हैं और उन ध्वंसावशेषों में कहीं छुपा है राजसी खजाना। नवयुवक सुशील एक पुराने जहाजी जमातुल्ला और अपने चचेरे भाई सनत के साथ इस टापू के रोमांचक अभियान पर निकलता है।
चौथी कहानी ‘मिश्मी लोगों का कवच’ एक जासूसी कहानी है, जिसमें एक किशोर जासूसी का प्रशिक्षण अभी ले ही रहा होता है कि उसके मामाजी पड़ोसी गाँव की एक हत्या की गुत्थी सुलझाने की जिम्मेवारी उस पर डाल देते हैं। कहानी के अन्तिम हिस्से में पारलौकिकता का भी पुट है, जो कि (पूर्वोत्तर भारत की एक जनजाति) मिश्मी लोगों द्वारा युद्ध से पहले पहने जाने वाले रक्षा-कवच पर केन्द्रित है।
पाँचवी एवं अन्तिम कहानी ‘मौत का डंका’ युद्ध पर आधारित साहसिक एवं प्रेम कहानी है। परिस्थितिवश दो भारतीय नवयुवक चीन पहुँचकर चीन-जापान के दूसरे युद्ध (1937-45) में चीन की ओर से शामिल हो जाते हैं। दो अमेरिकी नर्सों के साथ उनकी दोस्ती भी हो जाती है। युद्ध की विभीषिकाओं के बीच कई बार वे सभी मौत के मुँह में जाने से बचते हैं।
किशोर उम्र के पाठक-पाठिकाओं के लिए खास तौर पर लिखी गयी कहानियों से उनका सिर्फ मनोरंजन ही नहीं होना चाहिए, बल्कि उनकी जानकारियों में वृद्धि भी होनी चाहिए— इस बात को ध्यान में रखकर संग्रह के अन्त में एक विस्तृत परिशिष्ट जोड़ा जा रहा है।
आशा है, किशोर पाठक-पाठिकाओं को यह संग्रह पसन्द आयेगा। देखा जाय, तो किशोरों को उनके जन्मदिन पर उपहार के रूप में अथवा विद्यार्थियों को प्रतियोगिताओं में पुरस्कार के रूप में देने के लिए यह पुस्तक सर्वथा उपयुक्त है।

About the Authors

मूल बाँग्ला लेखक: विभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय

जन्म— 24 अक्तूबर, 1894 ई., घोषपाड़ा—मुरतीपुर गाँव, अब नदिया जिला, प. बँगाल
देहावसान— 1 नवम्बर, 1950 ई., घाटशिला, अब झारखण्ड
पुरस्कार— रवीन्द्र पुरस्कार (मरणोपरान्त), 1951
सहधर्मिणी— गौरी देवी (जिनका देहान्त कॉलेरा से हो गया था) और रमा चट्टोपाध्याय
शुरुआती जीवन— बिभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय का जन्म उनके ननिहाल में हुआ था और उनका बचपन बैरकपुर में बीता, जहाँ उनके परदादा बशीरहाट से आकर बस गये थे। उनके पिता महानन्द बन्द्योपाध्याय संस्कृत के विद्वान थे और पेशे से कथावाचक थे। उनकी माता मृणालिनी देवी थीं। पाँच भाई-बहनों में बिभूतिभूषण सबसे बड़े थे।
एक मेधावी छात्र के रुप में उन्होंने बनगाँव हाई स्कूल से एण्ट्रेन्स एवं इण्टर की पढ़ाई की; सुरेन्द्रनाथ कॉलेज (तत्कालीन रिपन कॉलेज) से स्नातक बने, मगर कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर की पढ़ाई वे अर्थाभाव के कारण पूरी नहीं कर पाये और जंगीपाड़ा (हुगली) में वे शिक्षण के पेशे से जुड़ गये। आजीविका एवं परिवार की जिम्मेवारी निभाने के लिए वे और भी कई पेशों से जुड़े रहे।
लेखन— बिभूतिभूषण बन्द्योपाध्याय के रचना-संसार की पृष्ठभूमि बँगाल का ग्राम्य-जीवन रहा है, वहीं से उन्होंने सारे पात्र लिये हैं। उन दिनों ‘प्रवासी’ बँगाल की प्रतिष्ठित साहित्यिक पत्रिका हुआ करती थी, जिसमें उनकी पहली कहानी ‘उपेक्षिता’ सन् 1921 ईस्वी में प्रकाशित हुई। 1925 में भागलपुर (बिहार) में कार्यरत रहने के दौरान उन्होंने ‘पथेर पाँचाली’ लिखना शुरू किया, जो 1928 में पूरा हुआ। उसी वर्ष यह रचना ‘प्रवासी’ में धारावाहिक रुप से प्रकाशित हुई और उन्हें प्रसिद्धि मिलनी शुरू हो गयी। अगले साल यह रचना पुस्तक के रुप में प्रकाशित हुई।
आज बँगला साहित्य में शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय के बाद उन्हीं का स्थान माना जाता है।
रचना-संसार—
उपन्यास: पथेर पाँचाली, अपराजितो, आरण्यक, आदर्श हिन्दू होटल, इच्छामति (इसी पर 1950-51 का रवीन्द्र पुरस्कार मिला था), दृष्टिप्रदीप, चाँदेर पाहाड़, हीरा-माणिक ज्वले, देबयान, विपिनेर संसार, अनुवर्तन, अशनि संकेत, केदार राजा, दम्पत्ति, सुन्दरबने सात बत्सर (इस कहानी की शुरुआत दशकों पहले एक अन्य लेखक ने की थी), दुई बाड़ी, मरणेर डंका बाजे, मिसमिदेर कवच, उत्कर्ण और आम आँठीर भेंपू।
कहानी-संग्रह: मेघ-मल्हार, मयुरीफूल, यात्राबादल, जन्म ओ मृत्यु, किन्नरदल, ताल नवमी, रूप हलूद, बेनिगीर फुलबारी, नवागत और तारानाथ तांत्रिक।
अन्य रचनाएं: स्मृतीर रेखा, हे अरण्य कथा कह।
उनकी रचनाओं पर आधारित फिल्में: पथेर पाँचाली, अपराजितो, आदर्श हिन्दू होटल, अपुर संसार, बक्सा-बदल, निशिपद्म, अमर प्रेम (निशिपद्म का हिन्दी रीमेक), निमंत्रण, अशनि संकेत, आलो, द फेस्टीवल: तालनवमी, भालोबासार अनेक नाम, चाँदेर पाहाड़, अमेजन अभियान (चाँदेर पाहाड़ पर ही आधारित), सहज पथेर गप्पो और अभियात्रिक (अपाजितो के अन्त पर आधारित)।
***
हिन्दी अनुवादक: जयदीप शेखर: रेखाचित्र, छायाचित्र, शब्दचित्र का एक शौकिया चितेरा

Book Details

ISBN: 9789358122336
Publisher: जगप्रभा
Number of Pages: 411
Dimensions: 5.5"x8.5"
Interior Pages: B&W
Binding: Paperback (Perfect Binding)
Availability: In Stock (Print on Demand)

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