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इतिहास गवाह है कि जब-जब मनुष्य अंधविश्वास, रूढ़ियों और मानसिक अशांति के घोर कलयुग में फंसा है, तब-तब किसी न किसी महापुरुष ने आकर मानवता को रास्ता दिखाया है। सिद्धार्थ गौतम का जीवन कोई साधारण कहानी नहीं है। यह एक राजा के बेटे का महल की सुख-सुविधाओं को छोड़कर, सच की खोज में खुद को तपाने और अंततः 'बुद्ध' बनकर लौटने का एक ऐसा ऐतिहासिक सच है, जिसने पूरी दुनिया की सोच को बदल दिया।
आज बाज़ार में बुद्ध के नाम पर बहुत सी काल्पनिक और चमत्कारिक कहानियाँ परोसी जाती हैं। लेकिन इस पुस्तक का उद्देश्य किसी चमत्कार का दिखावा करना नहीं, बल्कि प्राचीन पालि ग्रंथों (त्रिपिटक) और पुरातात्विक प्रमाणों के आधार पर बुद्ध के वास्तविक, तार्किक और वैज्ञानिक रूप को सामने लाना है। बुद्ध ने कभी नहीं कहा कि मेरी बात पर आँख मूँदकर विश्वास करो; उन्होंने कहा—'अप्प दीपो भव' यानी अपना दीपक स्वयं बनो। यह जीवनी आपके भीतर छिपे उसी विवेक को जगाने का एक छोटा सा प्रयास है।
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