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अधुरा इतकाम ( Adhoora - Intiqaam ) . वह एक वीराने खंडहर जहां भयावह अंधेरापन जहां दिन में भी कोई नहीं जाता। वहां एक ऐसा राज दफ़न था जहां इंसाफ दम तोड़ देता वहां जन्म लेता है बदले की खौफनाक आग। एक तरफ जाने माने जुर्म की दुनियाँ के बेताज बादशाह जो दुनिया जीत लेना चाहता है जिसकी जड़ें इतनी मजबूत की सत्ता और कानून उनके ताकत के आगे नतमस्तक होती है। जिसने जुर्म की इंतहा पार करते हुए ना जाने कितनी अबलाओ की जिंदगी से खिलवाड़ किया ना जाने कितने घर परिवार उजाड़े उनमें से एक था आदित्य राज मल्होत्रा। उनका एक हंसता खेलता परिवार पल भर में उजड़ गया। अपनों को खोने का दर्द और अन्याय की आग उसे जीने नहीं देती थी। और एक तरफ एक अबला नारी सुमननंदा जो सीधी सादी मासूम जो अपनों को खोया, उन दरिंदों के बेहिसाब जुल्म सहे लेकिन दुश्मन उनको मरा हुआ मान लिया। मगर किस्मत को कुछ और ही मंजूर था वो वापस लौट आयी एक नयी पहचान और सीने में सुलगती हुई वही पुरानी आग लेकर। अब तो खेल शुरू होगा जहां हर मोहरा अपनी चाल चलेगा लेकिन जीत उसकी होगी जिसका इंतकाम अभी होना बाकी है।
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