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इस पुस्तक के विषय में
अमेरिका में अपने प्रारम्भिक वर्षों के दौरान नियमित रूप से व्यापक व्याख्यान दौरों में आयोजित सार्वजनिक प्रवचनों और कक्षाओं में और बाद के वर्षों में उनके द्वारा संस्थापित सेल्फ-रियलाइज़ेशन फेलोशिप मंदिरों में श्री श्री परमहंस योगानन्दजी प्रायः अपने श्रोताओं के लिए प्रतिज्ञापन, मानसदर्शन या आराधनापूर्ण आहवान का संचालन किया करते थे। इन आध्यात्मिक पद्धतियों, जिनमें अनन्त ब्रह्म के सम्बोधन एवं अनुभव के असंख्य साधनों का समावेश है. का प्रभाव अत्यंत व्यापक है।
1925 के पश्चात्, जब श्री योगानन्दजी ने लॉस एंजेलिस में अपनी संस्था के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय की स्थापना की और ईस्ट-वेस्ट पत्रिका (1948 में उन्होंने इस पत्रिका का नाम बदल कर सेल्फ-रियलाइजेशन रखा) का प्रकाशन प्रारम्भ किया, तो इस प्रकार के कई चिंतन पत्रिका में प्रकाशित किये गए तथा 1932 में. सेल्फ-रियलाइजेशन फेलोशिप ने इनमें से लगभग 200 चिन्तनों का प्रकाशन आध्यात्मिक चिंतन (Metaphysical Meditations) पुस्तक के रूप में किया। तब से...
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