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भिलाई की भट्टियों से उठता धुआँ रोज़ तेजस की ज़िंदगी का हिस्सा रहा है। फिर एक दिन उसकी हथेली में एक चिंगारी जागती है — ऐसी चिंगारी जो बुझती नहीं।
सदियों पहले पाँच ऋषियों ने एक अनंत, विनाशकारी भूख को पाँच तत्वों में बाँट दिया था — अग्नि, जल, वायु, धरती, आकाश — और एक नियम बनाया: पाँचों कभी एक जगह इकट्ठा न हों, क्योंकि उनके मिलते ही एक पुराना अभिशाप जाग उठेगा। सदियों तक यह नियम चुपचाप निभता रहा।
पर अब, इसी सदी में, पाँचों तत्व एक साथ जाग रहे हैं। भिलाई के एक मामूली-से लड़के तेजस को अपनी हथेली की आग का मतलब भी नहीं पता कि उसे पहले से ढूँढा जा चुका है — और हर ताक़त की एक क़ीमत होती है, जो उसे अपने सबसे प्रिय रिश्तों से चुकानी होगी।
पंचतत्व — छह किताबों की एक सीरीज़, जो भारतीय मिथक और समकालीन fantasy को एक साथ बुनती है। "ज्वाला" इस सफ़र की पहली किताब है, जहाँ आग पहली बार जागती है।
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