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वाराणसी के घाटों की एक अनाथ लड़की, नायरा, हर सुबह आरती में गाती है — और हर बार, गंगा का पानी उसकी आवाज़ पर जाग उठता है। सदियों पहले पाँच ऋषियों ने एक अनंत, विनाशकारी भूख को पाँच तत्वों में बाँट दिया था — अग्नि, जल, वायु, धरती, आकाश — और अब वे एक-एक करके जाग रहे हैं। जल जाग चुका है, और नायरा को अपनी विरासत का सामना करना है — साथ ही एक बेबाक नाविक कबीर से गहराता प्रेम, और वाराणसी के घाटों के अंधेरे में छिपे भैरव के ख़तरनाक इरादों से भी। तेजस और ईशा के साथ मिलकर, नायरा का सफ़र गंगा की गहराइयों में उतरता है — जहाँ याददाश्त डुबो सकती है, और भरोसा ही सबसे बड़ी ताक़त बन सकता है। पंचतत्व — छह किताबों की एक सीरीज़, जो भारतीय मिथक और समकालीन fantasy को एक साथ बुनती है। "वरुण" इस सफ़र की दूसरी किताब है, जहाँ जल पहली बार जागता है।
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