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शून्यगढ़ की गढ़ बावड़ी में, पाँचों धारक — तेजस, नायरा, विहान, मीरा और शौर्य — आख़िरकार एक साथ खड़े हैं। सदियों पहले पाँच ऋषियों ने क्षय को पाँच टुकड़ों में बाँटकर एक सील लगाई थी; वह सील अब दरक रही है, और विषाक्ष पहले ही भीतर उतर चुका है। नियति अपना पूरा सच बताती है, और पाँचों को समझना है कि जो ताक़त उन्हें जोड़ती है वही ताला खोल भी सकती है और बाँध भी सकती है। हर रिश्ता, हर कीमत, हर बलिदान अब दांव पर है। पंचतत्व सीरीज़ का यह अंतिम अध्याय है — जहाँ पाँच तत्व, एक भूख, और भरोसे का सबसे बड़ा इम्तिहान आमने-सामने आते हैं।
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