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सुमित के लिए सारा सिर्फ़ एक कुत्ता नहीं थी — वह वो एक किलोमीटर की दूरी थी जो हर शाम घर लौटने का मतलब बदल देती थी। तीन साल का साथ, हज़ार छोटी-छोटी बातें, एक गली, एक गेट, और एक इंतज़ार जो कभी ख़त्म नहीं होता था।
'सुमित और सारा' एक अधूरी कहानी है — प्यार की, साथ की, और उस दूरी की जो हमेशा साथ रहती है, भले ही रास्ते अलग हो जाएँ।
एक ऐसी कहानी जो आपको हँसाएगी, रुलाएगी, और आपके अपने किसी साथी की याद दिला देगी।
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