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नैना ग़ायब है। मिली हुई अँगूठी के भीतर खुदा एक दूसरा नाम उसके मंगेतर अयान मिर्ज़ा को अपने ही अतीत की ओर लौटाता है। किस स्मृति पर भरोसा किया जाए और किस अधूरे उत्तर को सच मानने की जल्दी न की जाए? "दसवाँ गवाह" की दूसरी पुस्तक में प्रेम, ईर्ष्या और पहचान की तलाश एक डॉक्टर की अपनी गवाही से टकराती है।
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