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सूरज कुशवाहा सरकारी स्कूल का शिक्षक है। 2020 की बाढ़ में उसकी नाव पलटी और उसकी कक्षा के ग्यारह बच्चे डूब गए। नाव में गिनती वह भूल गया था, और तब से वह हर चॉक को रुकी-सी हाथ में लिए गिनता रहता है। फ़रवरी की एक रात उसे गुरुत्व मोड़ने की शक्ति मिलती है। पर दिल पर बोझ बढ़ता है, एक समय में सिर्फ़ एक बड़ी चीज़ सँभलती है, और ज़्यादा में नाक से ख़ून बहता है। पत्नी सुनीता और चार साल की बेटी गौरी को वह यह बताने से डरता है। उधर एक भारी छाया बिहार की धरती को नीचे खींच रही है। क्या सूरज इस बार गिनती पूरी कर पाएगा?
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