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सूरजपुरा-खेड़ा के महिला कबड्डी क्लब की चटाई इतनी फट चुकी है कि उस पर रेखाएँ भी ठीक से नहीं दिखतीं।
कोच मीनाक्षी तोमर इकतालीस की हो चुकी हैं और जानती हैं कि इस क्लब के पास एक ही मौसम बचा है। लीग में उतरने की अंतिम तारीख़ पास है, शुल्क की रक़म क्लब की जेब से बहुत बड़ी है, और कस्बे की नई अकादमी अपने नए जूतों और चमकती चटाई के साथ उन्हीं की खिलाड़ियों पर नज़र रखे बैठी है। कप्तान नसीम बानो के घुटने पर बोझ है, नई लड़की काजल के पैरों में आग है, और रसोई में कमला बुआ सबके लिए रोटी बेलती हैं, यह जाने बिना कि कितनों का घर इसी क्लब से चलता है।
एक मौसम, एक टीम और एक सवाल: जो चटाई पर उतरता है, वह किसके लिए लौटता है?
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