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एक हज़ार साल की भूख। एक आख़िरी सन्धि।
उज्जैन की रात में पर्दा काँप रहा है। पाँच कीलें अपनी जगह हिल चुकी हैं, और जो भार सदियों से किसी एक के कंधे पर था, वह अब बँटने को है। वेश, तारा, ज़ोरम, विकी और उन्नीस साल की अन्वया को एक ऐसा फ़ैसला लेना है जिसे कोई मंत्र, कोई तलवार और कोई ख़ून नहीं ले सकता।
और अद्रिक, जिसने हज़ार साल मौत से भागकर बिताए, अब पहली बार उसकी तरफ़ मुड़कर खड़ा है।
आख़िरी सन्धि अंतराल श्रृंखला का पहला समापन है: पुलिसिया रफ़्तार, पुरानी भूख और उस प्रेम की कहानी, जो मरने से नहीं डरता, पर जाने देना सीखता है।
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