You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
बेतिया का कृष हंसी में सच छुपाता है। वाल्मीकि नगर की काव्या चुप्पी में आग रखती है। एक रील, एक कमेंट, एक मुलाकात और फिर सोशल मीडिया का वह तूफान जो दो दिलों को सार्वजनिक संपत्ति बना देना चाहता है। गंडक के पानी, बेतिया की गलियों और जंगल की रातों के बीच यह कहानी पूछती है: क्या प्यार को सबूत चाहिए, या बस मौजूदगी?
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book आनी: आग और पानी.