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बॉस्फोरस की एक रात। एक गोली। और एक ऐसी गुमशुदगी, जिसका जवाब अपने ही दफ़्तर में छिपा है।
इस्तांबुल के ग्रैंड बाज़ार में शुरू हुआ मिशन लीक हो जाता है। विक्रम राठौड़ पानी के किनारे गिरता है। उसकी लाश नहीं मिलती। अब अनाया मेहरा को उस जाल के भीतर उतरना है जो उसकी हर चाल पहले से जानता है।
शक की सुई उसके अपने गुरु तक जाती है। किताबों में छिपे पन्ने, बंदरगाह के साये और रात के पानी पर भागती नावें उसे एक ऐसे संदेश की ओर ले जाती हैं, जो एक मिशन से कहीं बड़ा है।
वह किस पर भरोसा करे, जब भरोसा ही दुश्मन का सबसे तेज़ हथियार हो?
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