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उम्र की दुआ "आठवाँ वचन" शृंखला का छठा भाग है। 2014, सोनकुंड। छियानबे बरस के ओम दादू की एक ही इच्छा बची है: अपने पुराने स्टेशन पर एक बार फिर लाल-हरी झंडी दिखाना। पर घर की चिंताएँ बड़ी हैं। उम्र, सफ़र, डॉक्टर वरुणेश की चेतावनी, और उसी महीने ऋतविक-हेमांगी के कारख़ाने का उद्घाटन।
ग्यारह बरस का शुभांकर दादू की घड़ी सँभालता है, सात बरस की मधुरिमा उनकी कहानियाँ, और अट्ठासी की कुंतला दादी अपनी पीली डायरी में छठा वचन लिखती हैं। एक सुबह दादू घर से ग़ायब हो जाते हैं। जब वह छत, जिसके नीचे पूरा घर पला, सिर से हटने लगे, तब आँगन क्या सँभालेगा?
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