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जिसके आने पर बत्ती लौट आती थी, आज उसी से शहर की बत्ती गुल है।
14 अप्रैल की उस रात के बाद जयपुर के बिजली-मिस्त्री इरफान कुरैशी को तारों की आवाज़ सुनाई देने लगी है। बिजली के हर उपकरण से वह बात कर सकता है, पर हर बातचीत उसकी याददाश्त का एक टुकड़ा ले जाती है।
राजस्थान के ग्रिड पर संकट गहराता है, घर में पत्नी रुखसाना और दोनों बच्चे डरे हुए हैं, और ध्रुव डायनेमिक्स का "यंत्र-सप्तक" पहली बार आज़माया जाने वाला है।
जब पूरा शहर अँधेरे में हो और याद ही दाँव पर हो, तो एक आदमी कितना कुछ खोकर रोशनी लौटाए?
ऋषभ: जयपुर का अँधेरा सप्तस्वर शृंखला की दूसरी पुस्तक है: निकट-भविष्य के भारत में सात स्वरधारियों, उनकी शक्तियों की कीमत और एक अनसुलझे सवाल की कहानी।
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