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बाहर के लोगों को पांडुलिपि में धन दिखता है। भीतर रहने वालों को आने वाली ठंड। एक पुरानी पांडुलिपि, पहाड़ में छिपे सोने के शहर की अफवाह और एक युवा अनुवादक, जिसे पहले अपने काम की सही पंक्ति चाहिए। अनन्या सोनार-गोम्पा पहुँचती है तो उसके सामने केवल फीके अक्षर नहीं खुलते। मठ के रसोइए की पुरानी चूक, एक किशोर की अपनी राह की इच्छा, एक पूर्व सैनिक का टूटा घर और घाटी में जाड़े से पहले अन्न का हिसाब भी है। जब एक पन्ना चोरी होता है और बर्फ रास्ते रोक देती है, अनन्या को तय करना पड़ता है कि उसका अनुवाद किसके काम आएगा। चमकती दीवारों के पीछे क्या सचमुच खजाना है? और अगर है, तो उसका अर्थ किसका होगा?
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