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काबुल की गलियों में एक गुमनाम तार बजी है।
एक मरा हुआ वैज्ञानिक। एक दफ़न चिप। और इक्कीस ऐसे मार्ग, जिन पर दुनिया की सबसे ख़तरनाक खेप चल रही है। रॉ के एजेंट विक्रम 'वज्र' और विश्लेषक अनाया के पास उसे रोकने के लिए सिर्फ़ एक नाम है: शून्य — एक ऐसा खेल, जिसका कोई चेहरा नहीं।
दारुल अमान के खंडहर से सालंग की बर्फ़ तक, वाख़ान की गलियारे से दिल्ली के अँधेरे कमरों तक — यह कहानी है उस दौड़ की, जिसमें हर क़दम पर मौत है और हर साथी पर शक़। और अंत में एक चेतावनी, जो हर किताब को बदल देती है:
"तुम्हारे अपने लोग तुम्हें बेच रहे हैं।"
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