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हुगली किनारे मिले शव के पैर उलटे हैं। उसकी बहन गायब है। उसके पास छोड़ा लाल कपड़ा उस शिकारी का नाम जानता है जिसे इस मामले में आना था।
नयनतारा सान्याल के लिए रात का रूप देखना कठिन नहीं। कठिन है उस चेहरे के सामने हथियार थामना जिसे वह चौदह वर्ष पहले खो चुकी है। काम देने वाली छोटी पर्चियों, बंद कमरों और नामों की सिलाई से शुरू हुआ रास्ता कोलकाता की रक्त कील तक जाता है। उसके बीच रक्ता है, एक बागी चुड़ैल रानी जो दूसरों के संबंधों को अपनी कैद का धागा बना चुकी है।
काशी से आए वेश और अन्वया अपने साथ शक्ति भी लाए हैं और उसकी कीमत भी। कालीघाट के पुराने बंगले में रहने वाला अद्रिक बहुत कुछ जानता है। फिर भी उसका हर उत्तर विश्वास नहीं बनता।
अमावस पास है। दरवाजे खोलने होंगे। मगर हर बचाव के बाद कोई घर वैसा नहीं रहेगा।
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