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जिस घर में वह पली थी, उसकी दीवारों ने सब सुन रखा था।
कोलकाता की संगीत-शिक्षिका निधि भट्टाचार्य को 14 अप्रैल की रात के बाद किसी भी जगह में बीते क्षणों की आवाज़ें दोबारा सुनाई देने लगी हैं। पर इस शक्ति की कीमत उसकी नींद है।
पुराने पुश्तैनी घर की दीवारों में बरसों की हँसी, झगड़े और अधूरे गीत दबे हैं। दो गर्भपातों का दुःख अब भी उसके और पति आदित्य के बीच खड़ा है, और घर की दीवारें वह सब दोहरा देती हैं जो वे दोनों कहना नहीं चाहते।
जब बीता हुआ हर पल सुना जा सके, तो आगे बढ़ना कितना मुश्किल हो जाता है?
गांधार: दीवारों की याद सप्तस्वर शृंखला की तीसरी पुस्तक है: निकट-भविष्य के भारत में सात स्वरधारियों, उनकी शक्तियों की कीमत और एक अनसुलझे सवाल की कहानी।
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