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जो मामला बंद मान लिया गया, वही सबसे ज़्यादा बोलता है।
मानसून में उफनती नर्मदा के पुराने घाट की एक सीढ़ी पर औरत की एक चप्पल पड़ी मिलती है। उसी दिन से स्कूल के गणित के मास्टर हरिप्रसाद दुबे लापता हैं। सब कहते हैं, यह आत्महत्या है।
पर सब-इंस्पेक्टर नंदिनी राठौर को दो बातें खटकती हैं: चप्पल बाईं ओर की है, और पानी में गया आदमी इतना सलीके से अपनी कॉपियाँ नहीं सजाकर जाता। सिंधुपुर की चौकी नंबर तेरह में, जिसे विभाग सज़ा वाली पोस्टिंग मानता है, एक पुरानी कहानी की पहली कड़ी खुलती है।
क्या एक अकेली चप्पल पूरे कस्बे का सच बदल सकती है?
घाट पर पड़ी चप्पल चौकी नंबर तेरह शृंखला की पहली पुस्तक है: एक छोटे कस्बे की चौकी, एक ज़िद्दी अफ़सर और सच की धीमी आँच वाली कहानी।
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