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इंजीनियर ओजस रैणावत की ज़िंदगी उस रात बदल गई, जब उसका बायाँ हाथ एक रहस्यमयी नीली चमक से भर उठा। शहर के नलों से उबलता पानी, घाट पर बैठा एक अजनबी बाबा, और एक मणि - जो अपनी रक्षा के लिए कुछ भी कर सकती है। सात साल की बेटी कुहू उसकी एकमात्र दुनिया है, और जब दुर्जय कंसौली की नज़र उसी मणि पर पड़ती है, तो एक पिता को अपनी दुनिया बचाने के लिए अपने ही शरीर के रहस्य से सामना करना पड़ता है। चक्र घूम चुका है... और फन उठ चुका है।
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