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सातवीं मंज़िल पर एक नया दरवाज़ा खुला है। ईरा सोलह की हो गई है और तारापीठ के नए आचार्य-प्रमुख कालीन्द्र मित्र का व्यवहार अजीब है। हँसते हुए भी वे कुछ छिपाते हैं, और विद्यार्थियों के बीच एक गुप्त कक्षा की फुसफुसाहट है, जो छाया-गलियारों में बात करने वाले एक गुरु के सामने लगती है। जब सबसे भरोसे वाला रास्ता सबसे बड़े जाल की ओर जाए, तो क़दम किस पर रखें? छाया-गुरु तारापीठ गाथा की छठी पुस्तक है: जादू, दोस्ती और असली भारत के भीतर छिपी एक दुनिया की कहानी।
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