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डैफ़ी खारसिंग गाँव के जड़-पुल की देखभाल करती है। 2029 में उसके पिता लिंगदोह कैंसर से चले गए और वह कुछ नहीं कर पाई। माँ इबालारी और दादी किन्पी के साथ वह उन पुलों को ज़िंदा रखती है जो पीढ़ियों में उगे हैं। दिसंबर की एक रात उसके हाथों में दूसरों के घाव भरने की शक्ति जागती है। पर हर चंगाई का दर्द कुछ दिन उसके अपने शरीर में उतरता है, और यह बात वह सबसे छिपाती है। उधर गाँव में एक बीमारी फैल रही है, और पुल पर गलन की एक काली लकीर उभर आई है। क्या डैफ़ी उसे ठीक कर पाएगी, जिसने सब कुछ सड़ाने की ठानी है?
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