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यात्रा के एक सौ इकतीसवें वर्ष में, एक सुबह कोई ऐसा जागता है जिसे जगाया नहीं गया था। चिकित्सक ज़ोया मैत्र के सामने सवाल है कि सोए हुए मनुष्य को लौटने का हक किसका है।
नाम के आगे की खाली जगह, पुरानी सहमति और बर्फ के नीचे सोया पूरा शहर, हर चीज अपने जवाब माँगती है।
जो लौटता है, वह पाता है कि इंतज़ार करने वाला घर बदल चुका है। क्या नौका उसके लिए जगह बना पाएगी?
ठंडी नींद वसुधा-नौका की छठी पुस्तक है: चिकित्सक ज़ोया मैत्र, ठंडी नींद से लौटे लोग और एक बदली हुई नौका की विज्ञान-कथा।
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