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रेवेनहिल की रिसेप्शनिस्ट काव्या लोगों को पुराने डाक बंगले की कहानियाँ सुनाती है। कमरा नंबर 13 की कहानी सबसे लोकप्रिय है, जबकि काव्या ने उसके भीतर कदम भी नहीं रखा। एक दिन पीतल की घंटी के नीचे उसे भुगतान की आधी पर्ची मिलती है। उसी समय इतिहास के वीडियो बनाने वाला ज़ैन एक बंद वेतन-संदूक की कथा लेकर पहुँचता है।
एक पुराना रजिस्टर, एक चिमनी का सफाई-हैच, छत की भूली खिड़की और चीनी मिट्टी की भट्ठी उन्हें ऐसे नामों तक ले जाते हैं जो इमारत के सौंदर्य से बाहर रह गए। चौकीदार रामधन कुछ जानते हैं, लेकिन वर्षों की चुप्पी उनके भरोसे पर बैठी है। पुरानी मेहमान हेलेन अपने परिवार की सजाई कहानी जाँचना चाहती हैं।
जब ज़ैन की एक भूल बंद कमरे को सार्वजनिक तमाशा बना देती है, प्रश्न है कि सच किस तरह दिखाया जाए और किसके अधिकार की कीमत पर। संदूक खुलेगा तो भीतर चमकता सोना नहीं होगा। जो होगा, उसे पढ़ने के बाद किसी का हिसाब पहले जैसा नहीं रहेगा।
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