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डायरी का आख़िरी सच "आठवाँ वचन" शृंखला का आठवाँ और आख़िरी भाग है। किसी की कहानी अधूरी मत रहने देना।
2026, सोनकुंड। सूर्यमुखी सदन में सगाई की तैयारियाँ हैं, और घर की तिजोरी में सैंतीस बरस से एक बंद लिफ़ाफ़ा रखा है, जिसे किसी ने पढ़ा नहीं। शुभांकर उसे लेकर झीलपुर के एक बूढ़े संगीत-शिक्षक के दरवाज़े पर पहुँचता है। एक बाँसुरी, एक सूखा सूर्यमुखी और एक अधूरी धुन उसका इंतज़ार कर रहे हैं।
जब आख़िरी पन्ना खुलता है, तब घर को अपना आठवाँ वचन निभाना है।
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