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21 मई 2262 को वसुधा अरुणा की कक्षा में पहुँचती है। एक सौ तैंतालीस साल की यात्रा का आख़िरी सवाल अब खिड़की के उस पार है।
अहान मैत्र, सुनीता, रेहाना और सारथी को तय करना है कि कौन उतरे, कब उतरे, और ईंधन, डर और उम्मीद का हिसाब कैसे बैठे।
नीम की डाल, बीज की शीशी और जागे हुए ग्यारह सौ लोग, सब एक पहले कदम का इंतज़ार कर रहे हैं। क्या अरुणा उन्हें घर देगी?
तट: अरुणा वसुधा-नौका की सातवीं और अंतिम पुस्तक है: अहान मैत्र, अरुणा की कक्षा, उतरने का फ़ैसला और पहला कदम की विज्ञान-कथा।
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