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ग्यारह साल की ईरा की आवाज़ से खिड़की का काँच चटक गया।
नासिक की एक गर्म सुबह ईरा बर्वे की आवाज़ ने घर की खिड़की तोड़ दी। पिता को कुछ समझ नहीं आया, माँ की पुरानी संदूक चुप रही, और उसी शाम एक काग़ज़ की चिड़िया पहला पत्र लेकर आ गई।
पत्र उसे बुला रहा है तारापीठ, जहाँ ऊँची पहाड़ी पर नादों का विद्यालय है और जहाँ हर बच्चे की आवाज़ में एक बीज सोया है। वहाँ दोस्त मिलेंगे, ज़ैन, तेनज़िन और कावेरी, और एक घमंडी प्रतिद्वंद्वी भी। और पुस्तकालय के नीचे की चुप्पी में कोई रातों को एक ही सुर गुनगुनाता है।
क्या ईरा अपनी आवाज़ को सँभाल पाएगी? और उसकी माँ की पुरानी संदूक में क्या छिपा है?
तारापीठ का पहला पत्र तारापीठ गाथा की पहली पुस्तक है: जादू, दोस्ती और असली भारत के भीतर छिपी एक दुनिया की कहानी।
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