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सारंग ताले ठीक करता है। बंद दरवाज़ों से उसे ऐसी आवाज़ें सुनाई देती हैं जिन्हें बाकी लोग सुन नहीं पाते। कस्बे में लोग उसे अजीब समझते हैं। फिर एक रात कोई सो नहीं पाता। पुराने किले की एक महीन दरार से निकला अँधेरा गलियों में फैलने लगता है।
दरार के उस पार एक लोक है जहाँ रात कभी खत्म नहीं होती। उसके नियम से कस्बे को बचाने की राह निकल सकती है। लेकिन शक्ति से पहले कीमत चुकानी होगी: अपने सचमुच संभव जीवनों में से एक को देखकर, समझकर, अपने हाथों छोड़ना होगा।
इनाया उसे रास्ता समझा सकती है। पिता उसका हाथ थाम सकते हैं। श्रुति उसकी बात सुन सकती है। फैसला कोई उसकी जगह नहीं कर सकता।
जब अपने लोगों को बचाने के लिए अपना एक जीवन खोना पड़े, तो लौटने का मतलब क्या रह जाता है?
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