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धवलकोट के पुराने विश्रामगृह में अवनि रावल माप लेने आई है। रात को वही घर उसकी नींद में खुलता है। फिर नींद के भीतर एक और नींद।
लौटने वाले का शरीर मौजूद है। उसका सामान और तस्वीरें भी। फिर भी अपने लोग उसे पहचान नहीं पाते। जैसे रिश्तों से कोई जरूरी हिस्सा चुपचाप निकल गया हो।
अवनि को दरवाजे का रहस्य जानना है। लेकिन पुराना अपनापन लौटाने की कीमत किसी और की नई यादें हों, तो वह किसे बचाएगी?
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