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दुबई चमकता है, पर उसकी चमक के नीचे एक बही दबी है। उसमें अंक हैं, और हर अंक के पीछे किसी का नाम।
अनाया काव्या अग्रवाल की उधार की पहचान लेकर शहर में उतरती है। गोल्ड सूक की गलियों से पाम जुमेरा की पार्टी तक, हर मुलाक़ात में एक छोटा झूठ है, और हर झूठ के पीछे कोई असली आदमी अपना दिन बदल रहा है। कबीर और नताशा साथ हैं, पर साथ चलना हर सवाल का एक जवाब नहीं होता।
प्रलय का पैसा कहाँ से आ रहा है, यह बही बता सकती है। मगर किसी का नाम मिल जाना उसकी पहचान नहीं, और किसी दोषी से मदद मिल जाना उसके किए का हिसाब नहीं मिटाता। सुनहरा निमंत्रण एक जाल भी हो सकता है।
रेगिस्तान का शहर इंतज़ार कर रहा है।
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