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बचपन में घाट पर से गायब हुई बहन इरावली का सच ढूँढने डॉक्यूमेंट्री बनाने वाला रितव्रत लौटता है सिद्धपुर - बिलौरी नदी के किनारे बसा वह कस्बा, जहाँ पुरानी हवेली वटछाया की दीवारों में आज भी रात को आवाज़ें चलती हैं। पैंतीस साल पुरानी बाढ़, एक ऐसा ख़ौफ़ जिसे बुज़ुर्ग सिर्फ़ 'तंत्री की भूख' कहकर चुप हो जाते हैं, हरे फ्रॉक वाली सात साल की एक परछाई, और दीवार में वह महीन दरार जिसमें से रोशनी आती है - रितव्रत जितना करीब जाता है, हवेली उतनी गहरी खिंचती है। क्या हर दरार के पार सच होता है?
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