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निधि दूसरों के आयोजन संभालती है, मगर अपने भाई अमन और तारा की शादी में घर की हर छोटी तैयारी उसी का काम बन जाती है। कभी कुर्सी रास्ते में अटकती है, कभी कपड़ों का पैकेट गलत पहुँचता है, और कभी बैंड दूल्हे से पहले दरवाज़े पर आ खड़ा होता है। गलतफहमियों और आख़िरी चाय के बीच, इस परिवार को समझना है कि शादी का काम बाँटना भी साथ रहने का हिस्सा है।
स्नेह, घरेलू उम्मीदों और अपनी जगह खोजते लोगों की एक हल्की-फुल्की कहानी।
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