You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
मृत लोगों के नाम फिर इस्तेमाल हो रहे हैं। ध्वनि विश्लेषक तारा सहगल के सामने ऐसी आवाज़ें आती हैं जिनके पीछे जीवित चेहरों को पहचानना आसान नहीं। एक समुद्री बंदरगाह से दिल्ली तक फैली इस खोज में हर पहचान के नीचे दूसरी पहचान छिपी है। सच तक पहुँचना ज़रूरी है। अपने नाम के साथ लौट पाना उतना आसान नहीं।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book दूसरे नाम की राख.