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नलिका सेन को करंज सराय में रहस्य नहीं, काम चाहिए। कपड़ों की धुलाई, घर का खर्च और बेटी की पढ़ाई के बीच एक रात उसकी अपनी आवाज बंद दहलीज़ के दूसरी ओर से लौटती है। पानी के साथ चलती छाया और सराय का छिपाया सच उसके रोजमर्रा के जीवन में उतर आते हैं। यह अलौकिक भय की कथा मेहनत, भरोसे और उस आवाज की भी कहानी है जिसे सुन लेना और समझ लेना एक बात नहीं।
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