You can access the distribution details by navigating to My Print Books(POD) > Distribution
दूरी तोड़ती है, या जोड़ती है?
दिल्ली और करकोट के बीच अब सैकड़ों मील हैं, और बीच में फ़ोन की घंटियाँ, चिट्ठी जैसी लंबी बातें और छुट्टियों की छोटी मुलाक़ातें।
सुलोचना दीदी की सेहत बिगड़ने लगी है, और जयपाल अपनी चाल तैयार कर रहा है। दोनों घरों में चुपके से नरमी उतर रही है: सरला की चुप्पी में ममता, और मंजुला की सुलोचना से दोस्ती।
जवाब मिलता है अस्पताल के एक दालान में, जहाँ महीनों बाद दो लोग आमने-सामने होते हैं, और उनके पीछे दोनों परिवार भी।
Currently there are no reviews available for this book.
Be the first one to write a review for the book दो शहर, एक रिश्ता.