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मुंबई की चॉल का एक लड़का अपनी खोई हुई बहन के पीछे दौड़ पड़ा है।
रोहन "रॉकी" जाधव डिलीवरी-बाइक चलाता है। दो साल पहले भीड़ भरे लोकल स्टेशन पर उसने टिकट लेने के लिए अपनी तेरह साल की बहन सानवी का हाथ छोड़ा, और वह फिर नहीं मिली। तब से वह हर रात बारिश में उसके गुमशुदगी के पोस्टर चिपकाता है।
21 जून की रात उसे पल-भर में बहुत तेज़ गति देने की शक्ति मिलती है। पर दौड़ के बाद भूख, ऐंठन और दमे जैसी हाँफ आती है, और तेज़ गति में दिशा खो जाती है। माँ वंदना और दोस्त सल्ली को वह कुछ नहीं बताता।
उधर शहर में चीज़ें और लोग घंटों के लिए मिट रहे हैं। क्या रॉकी अपनी रफ़्तार को सही दिशा दे पाएगा?
धावक: छूटे हुए हाथ की दिशा संगम सुपरनेचुरल यूनिवर्स की पहली पुस्तक है: मुंबई की चॉल, भीड़ में खोई एक बहन और वेग की क़ीमत की एक विज्ञान-कथा।
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