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अश्मवेल में पानी कम है। वर्षा के छोटे उपकरण का अंक शहर की तैयारी को दिशा देता है, मगर मीरा कौल को उसके भीतर अटकी धूल मिलती है। पहाड़ी के पीछे करंज-मोड़ का रंग पटल पर लगभग खाली है। वहाँ घर हैं, स्वास्थ्य-कक्ष है, दुकान है और एक ऐसा रास्ता है जो नक्शे में खुला दिखता है, जमीन पर नहीं।
जब समुद्र से उठता बादल-पथ बदलने लगता है, शहर के अधूरे काम एक रात के सामने आ खड़े होते हैं। गलत पुर्जा, ढीला सहारा, संकरी नाली और सीढ़ी पर अटकी हाथगाड़ी। जयवंत अपने पुराने हस्ताक्षर से बच नहीं सकते। कावेरी सबकी जरूरत सँभालते हुए बेटी का समय खो रही हैं। तारक का घायल कंधा पर्चियों में दर्ज पूरी सेवा से अलग सच है। रेणु के निजी पन्ने बताते हैं कि पानी की स्मृति का अपना आकार होता है।
लोग निकलेंगे। कुछ चीजें बचेंगी, कुछ नहीं। पानी उतरने के बाद कौन-सा नुकसान गिना जाएगा और कौन-सा केवल एक सूखी पोटली में रहेगा?
नक्शे से बाहर की बारिश भविष्य के एक काल्पनिक शहर में मौसम, श्रम और घर की कथा है। यहाँ बेहतर नक्शा जरूरी है, मगर दुनिया हर बार उससे कुछ बड़ी रहती है।
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